किसी की सलामती की दुआ

किसी की सलामती की दुआ


किसी की सलामती की दुआ – Kisi Ki Salamati Ki Dua, हर इंसान अपनों को सलामत देखना चाहता है इसलिए हम आपको आज बता रहे है शोहर की सलामती की दुआ और बच्चे की सलामती की दुआ. इसके अलावा आज पढ़े हमारी ईमान की सलामती की दुआ.

Kisi Ki Salamati Ki Dua

घर-परिवार में सबकुछ कुशल हो। परिवार के सभी सदस्यों की सलामती बनी रहे। इसकी कामना इस्लामी इबादत के दौरान हमेशा की जाती है। रमजान के दिनों के अलावा ईद-बकरीद के मौके पर इसकी विशेष दुआएं की जाती है। परिवार के बड़े सदस्य छोटे सदस्यों के हिफजत से अल्लाहताला से दुआ करते हैं, जबकि हम उम्र सदस्यांे में खासकर शौहर-बीवी एक-दूसरे की सलामती के लिए दुआएं करते हैं।

किसी की सलामती की दुआ – Kisi Ki Salamati Ki Dua

कई बार कुछ दुआएं अचानक आई मुसीबतों से छुटकारा पाने के लिए होती हैं, जबकि बच्चों की सलामती के लिए की जाने वाली दुआएं उनके मां-बाप द्वारा हमेशा नमाज पढ़ते वक्त की जाती है। इसी तरह से किसी के निकाह होने पर नवविवाहितों के मोहब्बत भरे सफल जीवन के सलामती की कामनाएं हर कोई करता है। कुछ सामान्य तरीके इस प्रकार हैं-

जिस किसी के सलामती की दुआ करना है उसका ध्यान जेहन में रख लें। फिर वजू बनाकर नमाज के किसी भी वक्त को अदा कर लें। अगर इस दुआ को पांचों वक्त के नमाज के बाद किया जाए तो और भी बेहतर होगा।
बिस्मिल्लाह पढ़ते हुए दरूदे पाक और शरीफ को 7 बार पढ़ने के बाद छोटी सी दुआ अल मुहयामिन को 1000 बार दुहराएं। फिर दरूदे शरीफ को सात बार पढ़ लें। इसके साथ अस सलाला दुआ को भी 1111 बार पढ़ लें।
उसके बाद अल्लाह मिंया सें अपने सारे रिश्ते की सलामती की दुआ करें और अपनी गलतियों की माफी मांगें।
अल्लाताला से यह अवश्य कहें कि परिवार में किसी भी सदस्य के साथ कभी भी नाराजगी या बदजुबानी की नौबत नहीं आने पाए। सभी सदस्यों के साथ प्यार-मोहब्बत बना रहे।

शौहर की सलामती की दुआ

शौहर की सलामती की दुआ – Shohar Ki Salamati Ki Dua, सभी औरत चाहती है कि उसका शौहर हर हाल में खुशहाल बना रहे। उसे किसी भी तरह की तकलीफ नहीं हो और हर मुसीबतों को डटकर सामना करने में सक्षम बना रहे। उसे पता है कि ऐसा होने पर ही शौहर उसपर अपनी मोहब्बत का दर्शा पाएगा।

इसके लिए अल्लाहताला से हमेशा सलामती की दुआएं मांगती रहती हैं, जो अमूमन तीन तरह की होती हैं- पहला शौहर के दिल में उसके प्रति बना मोहब्बत हर हाल में सलामत बना रहे।

दूसारा, उसका शौहर हमेशा सेहतमंद बना रहे और तीसरा, उसे काम-कारोबार में तरक्की मिले। इन दुआओं से मिंया-बीवी के बीच आपसी मोहब्बत बनी रहती है और उनपर अल्लाहताला की दुआओं में कोई कमी नहीं आती है।

Shohar Ki Salamati Ki Dua

  • मिंया-बीवी के रिश्ते की सलामती के लिए बहुत ही छोटा वजीफा ‘अस सलाला’ बताया गया है। इशा की नमाज के बाद रात में शौहर के सो जाने के बाद आधी रात को इसे करना है।
  • घर के एकांत कोने में साफ चादर बिछाकर बैठ जाएं। ताजा वजु के साथ सबसे पहले दरूदे शरीफ को 11 बार पढ़ लें। उसके बाद वजीफे की 1000 बार पढ़ें। ध्यान रहे आवाज सिर्फ आपको सुनाई देनी चाहिए।
  • अंत में दरूदे शरीफ को फिर से 11 बार पढ़ने के बाद खुदा से शौहर की हर स्तर पर सलामती की दुआ करें। दुआ मांगते हुए कहें- ऐ मेरे रब, हमारे रिश्ते में सलामती और सुकून वख्श दे। साथ में रखे एक ग्लास पानी पर दम कर पी लें और फिर ही शौहर का ख्याल जेहन में बनाकर सो जाएं।

बच्चे की सलामती की दुआ

बच्चे की सलामती की दुआ – Baccho Ki Salamati Ki Dua, दुनिया में हर मां-बाप चाहते हैं कि उसके बच्चे हमेंशा मुसीबतों से महफूज रहें। उनकी सेहत पर कोई आंच नहीं आने पाए। किसी भी तरह की बाहरी ताकत से उनका नुकसान नहीं हो। कोई अपनी काली नजर से शिकार नहीं बना सके। इसके लिए वे उनकी सलामती के लिए अल्लाहताला से दुआएं मांगते हैं।

बच्चे को हर मुसीबत और बला से सुरक्षित रखने एवं बुरी नजर से बचाने के लिए ताबीज बनाने की भी सलाह दी गई है। मां-बाप को चाहिए कि वे उनकी हिफाजत के लिए किसी मौलवी के बताए गए निर्देश के अनुसार ताबीज बनवाकर बच्चे को पहना दें। इसका सिलसिलेवार तरीका इस प्रकार बताया गय है-

Baccho Ki Salamati Ki Dua

बच्चे की सलामती के लिए र्कुआन-ए-पाक में कलमा दिया गया है, जिसे ताबीज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
कलमा है-
आउजु बिकलिमातिल्लाही मिन शरिं कुल्ली शयतानिन, व हामनिन व मिन शरिं कुल्लि आयुनिन लाम्मतिनएक।

फज्र की नमाज के बाद बच्चे की मां या उसके पिता, या फिर दोनों सुबह साफ चादर पर बैठ जाएं। साथ में सादा कागज रखें और उसपर बताए गए कलमा को हरे रंग की स्याही से साफ-साफ अक्षरों में लिख लें।
उसके बाद उसे सात तह में मोड़कर छोटा बना लें। फिर उसे हरे कपड़े में बांधकर बच्चे के गले में पहना दें।
इससे पहले दरूदे शरीफ को 11 बार पढ़ने के बाद कलमा को 141 बार पढ़ लें। उसके बाद दरूदे शरीफ को फिर से 11 बार पढ़ें और अल्लाताला से बच्चे की सलामती की दुआ करें।

ईमान की सलामती की दुआ

ईमान की सलामती की दुआ – Iman Ki Salamati Ki Dua, कहते हैं न कि इंसान की ईमान है तो सबकुछ है, वरना इसके बगैर समाज-परिवार के लोग उसकी नीयत में खोट समझते हैं। कोई भी इंसान बेईमानी की बुनियाद पर इज्जत की इमारत बुलंद नहीं कर सकता है। इसलिए र्कुआन-ए-पाक में ईमान की सलामती के बारे में पूरे जोर देकर बताया गया है। यह दुआ हमेशा बनी रहे, इसके लिए आयत को नियमित पढ़ने की सलाह दी गई है।

Iman Ki Salamati Ki Dua

  • यह एक तरह से वजीफे का अमल है, जिसकी आयत है-
  • या हय्यु या कय्यूमू या बदि अस-समावाती वल अरदि या जल जलाली वल इकरामी नव्विरा कल्बी बि-नूरी मा आरिफतिका या अल्लाहु या अल्लाहु या अल्लाहु।
  • इस वजीफे को स्त्री या पुरुष कोई भी कर सकते हैं, लेकिन मौलवी के सलाह-मश्वीरे और उनकी हिदायतों का पालन करना जरूरी है।
  • खवातीन को माहवारी या हैज में इसे नहीं पढ़ना है, लेकिन हां इस अमल में दुआ को सिर्फ वजु बनाकर कर सकती हैं।
  • कम-से-कम 21 दिनों तक किए जाने वाले इस अमल की शुरूआत किसी भी फज्र की नमाज के बाद करें।
  • साफ चादर पर ताजा वजू बनाकर बैठ जाएं। फिर फज्र की नमाज अदा कर लें।
  • उसके बाद बताए गए आयत को 41 मर्तबा पढ़ लें।
  • इसके अव्वल और अंत में दरूदे इब्राहिम को 11-11 बार पढ़ना जरूरी है।
  • अंत में अल्लाहताला से अपनी नेकी और ईमानदारी की दुआ करें और कहें- आपके ईमान को सलामत रखें। चाहे जितनी भी मुसीबत क्यों नहीं आ जाए ईमान बिगड़ने नहीं पाए।

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